Epiretinal Membrane क्या है? कारण, लक्षण, जांच और इलाज की पूरी जानकारी
Epiretinal Membrane (एपिरिटिनल मेम्ब्रेन) आंखों से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है, जिसके बारे में बहुत से लोगों को तब तक पता नहीं चलता, जब तक वे नियमित नेत्र जांच नहीं कराते। यह समस्या खासकर उम्र बढ़ने के साथ अधिक देखने को मिलती है और धीरे-धीरे दृष्टि की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इस लेख में हम एपिरेटिनल झिल्ली को सरल भाषा में समझेंगे इसके कारण, जोखिम कारक, लक्षण, जांच की आधुनिक तकनीकें, उपचार विकल्प, सर्जरी के बाद की रिकवरी, और जीवनशैली से जुड़े उपयोगी सुझाव।
Epiretinal Membrane क्या है?
Epiretinal Membrane एक पतली, पारदर्शी या अर्ध-पारदर्शी परत होती है, जो आंख के रेटिना (Retina) की अंदरूनी सतह पर बन जाती है। इसे कभी-कभी पकर या सेलोफेन मैक्युलोपैथी भी कहा जाता है। रेटिना आंख का वह संवेदनशील भाग है, जो प्रकाश को ग्रहण करके मस्तिष्क तक संकेत भेजता है। रेटिना के मध्य भाग को Macula कहते हैं, जो हमें साफ, तेज और बारीक विवरण देखने में मदद करता है। जब एपिरेटिनल झिल्ली के ऊपर बनती है, तो वह उसे खींच सकती है, जिससे दृष्टि में विकृति आ सकती है।
एपिरेटिनल झिल्ली के अन्य नाम
चिकित्सा साहित्य में एपिरेटिनल झिल्ली को कई नामों से जाना जाता है:
- एपिमैक्युलर मेम्ब्रेन
- सरफेस-रिंकलिंग रेटिनोपैथी
- सेलोफेन मैक्युलोपैथी
- प्री-रेटिनल मैक्युलर फाइब्रोसिस
इन सभी नामों का अर्थ मूलतः एक ही स्थिति से है, रेटिना की सतह पर असामान्य झिल्ली का बनना।
आंख के कौन-से हिस्से प्रभावित होते हैं?
एपिरेटिनल झिल्ली मुख्य रूप से रेटिना की अंदरूनी सतह पर बनती है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है।
हमें यह सक्षम बनाती है कि हम:
- छोटे अक्षर पढ़ सकें
- चेहरों को पहचान सकें
- सीधी रेखाओं को सही रूप में देख सकें
जब एपिरेटिनल झिल्ली सिकुड़ने लगती है, तो खिंचाव (Puckering) पैदा होता है, जिससे चीजें टेढ़ी-मेढ़ी दिखने लगती हैं।
एपिरेटिनल झिल्ली किन कोशिकाओं से बनती है?
यह झिल्ली मुख्यतः ग्लियल कोशिकाओं (Glial Cells) से बनी होती है। ये कोशिकाएं तंत्रिका कोशिकाओं को सहारा देती हैं, लेकिन सामान्य स्थिति में इन्हें रेटिना की सतह पर झिल्ली नहीं बनानी चाहिए। किसी कारणवश जब ये कोशिकाएं गलत जगह पर पहुंच जाती हैं, तो Epiretinal Membrane का निर्माण होता है।
एपिरेटिनल झिल्ली किसे हो सकती है? (जोखिम कारक)
एपिरेटिनल झिल्ली किसी भी लिंग के व्यक्ति को हो सकती है। इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं:
उम्र
- 50 वर्ष से ऊपर के लगभग 2% लोगों में
- 75 वर्ष से ऊपर यह आंकड़ा 20% तक पहुंच सकता है
दूसरी आंख में एपिरेटिनल झिल्ली होना
एक आंख में एपिरेटिनल झिल्ली होने पर दूसरी आंख में भी बनने की संभावना 10–20% तक रहती है।
Posterior Vitreous Detachment (PVD)
आंख के अंदर मौजूद जैल-जैसा पदार्थ (Vitreous) जब रेटिना से अलग होता है, तो एपिरेटिनल झिल्ली बनने की संभावना बढ़ जाती है।
एपिरेटिनल झिल्ली के कारण
इडियोपैथिक एपिरेटिनल झिल्ली
अधिकांश मामलों में Epiretinal Membrane का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता। इसे इडियोपैथिक कहा जाता है।
अन्य संभावित कारण
कुछ मामलों में एपिरेटिनल झिल्ली इन स्थितियों से जुड़ी हो सकती है:
- डायबिटिक रेटिनोपैथी
- आंखों में सूजन
- आंख पर चोट
- आंख की सर्जरी
- रेटिना में छेद या डिटैचमेंट
- आंख के ट्यूमर
रेटिना की सतह पर हल्की-सी क्षति भी ग्लियल कोशिकाओं को वहां पहुंचने का मौका दे सकती है, जिससे एपिरेटिनल झिल्ली बन जाती है।
Epiretinal Membrane के लक्षण
कई लोगों में Epiretinal Membrane होने के बावजूद कोई लक्षण नहीं दिखते। लेकिन जैसे-जैसे झिल्ली मोटी या सख्त होती जाती है, लक्षण उभरने लगते हैं।
सामान्य लक्षण
- मेटामॉर्फोप्सिया: सीधी रेखाएं टेढ़ी-मेढ़ी दिखना
- धुंधली दृष्टि
- दोहरी छवि (Double Vision)
- रोशनी से अधिक संवेदनशीलता
- वस्तुएं वास्तविक आकार से बड़ी या छोटी दिखना
एपिरेटिनल झिल्ली की जांच कैसे होती है?
नियमित नेत्र परीक्षण
अधिकतर मामलों में एपिरेटिनल झिल्ली का पता सामान्य आंखों की जांच के दौरान चलता है।
Optical Coherence Tomography (OCT)
OCT एक आधुनिक इमेजिंग तकनीक है, जिससे रेटिना की परतों की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीर मिलती है। यह एपिरेटिनल झिल्ली की गंभीरता समझने में बहुत सहायक है।
एपिरेटिनल झिल्ली का उपचार
बिना लक्षण वाले मामलों में
यदि Epiretinal Membrane से दृष्टि प्रभावित नहीं हो रही, तो आमतौर पर केवल निगरानी (Monitoring) की जाती है।
सर्जरी (Vitrectomy)
जब दृष्टि रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे या विज़न 20/50 से खराब हो जाए, तब सर्जरी की सलाह दी जाती है।
इस सर्जरी में:
- आंख के अंदर से विट्रियस जैल हटाया जाता है
- Epiretinal Membrane को सावधानी से निकाला जाता है
संभावित जोखिम
- रेटिनल डिटैचमेंट (लगभग 1%)
- संक्रमण (लगभग 1/2000)
सर्जरी के बाद रिकवरी और परिणाम
अधिकांश मरीजों में 3–6 महीनों में सुधार दिखने लगता है। कुछ मामलों में पूरी रिकवरी में 1–2 साल भी लग सकते हैं।
रिकवरी निर्भर करती है:
- Epiretinal Membrane कितने समय से थी
- कितना खिंचाव था
- कारण इडियोपैथिक था या नहीं
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Epiretinal Membrane दोबारा होने की संभावना
सर्जरी के बाद एपिरेटिनल झिल्ली के दोबारा बनने की संभावना लगभग 1% होती है।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि आपको:
- सीधी रेखाएं टेढ़ी दिखें
- अचानक दृष्टि में बदलाव महसूस हो
- धुंधलापन बढ़े
तो तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर पहचान से Epiretinal Membrane का उपचार अधिक प्रभावी होता है।
जीवनशैली और सावधानियां
हालांकि एपिरेटिनल झिल्ली को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन:
- नियमित आंखों की जांच
- डायबिटीज और अन्य बीमारियों का नियंत्रण
- आंखों की चोट से बचाव
दूसरी आंख में समस्या की संभावना को कम कर सकते हैं।
निष्कर्ष
Epiretinal Membrane एक सामान्य लेकिन गंभीर हो सकने वाली आंखों की स्थिति है। सही समय पर जांच, आधुनिक तकनीक और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से अधिकांश मरीजों को अच्छा परिणाम मिलता है।
यह विस्तृत लेख allwellhealthorganic टीम द्वारा इस उद्देश्य से लिखा गया है कि पाठकों को Epiretinal Membrane के बारे में संपूर्ण, भरोसेमंद और उपयोगी जानकारी मिल सके। यदि आप या आपके परिवार में किसी को दृष्टि से जुड़ी समस्या हो रही है, तो देरी न करें और विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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